योग की जानकारी
योग अपने आप में है योग दर्शन उन समस्त का अनुसरण है जो प्राणी जगत है चलायमान में शामिल हैं अर्थात योग केवल शरिरिक व्यायाम नही है वरन निश्चित रूप से दो विकल्प का जोड जैसे आत्म और परमात्मा उसी प्रकार खुद से पवित्रता को साधक साक्षी बनाता है योग के साथ गतिमान हो सकता है आगे हम योग प्रस्तुतीकरण में इसे और भीतर से ग्रहण करेगे! Example = Occult Anatomy जिस प्रकार शरीर विज्ञान भी विस्तृत रूप में है उसी प्रकार योग * योग अत्यंत ही विस्तृत विस्तार है अतः मैं आशा करता हूं की आप सभी को योग का महत्व समझा सकूंगा! योगउद्भव आज के हजारों वर्ष पहले हुआ था इसका उपनिषदों में विवरण है योग संस्कृत धातु 'युज' से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है व्यक्तिगत चेतना या आत्मा का सार्वभौमिक चेतना या रूह से मिलन होना योग संतुलित तरीके से एक व्यक्ति में निहित शक्ति में सुधार या उसका विकास करने का शास्त्र है योग के अभ्यास से उस प्रकार की शक्तियों का उदय होता है जिनको विभूति या...

